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चंद्रमा पर प्रक्षेपण की उल्टी गिनती शुरू
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۞ TPS ۞
Sun Oct 12 2008, 09:14AM

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भारत के पहले मानव रहित यान के चंद्रमा पर प्रक्षेपण की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इस मिशन से भारतीय वैज्ञानिकों को चंद्रमा की चाल और स्वभाव के साथ कई अन्य रोचक तथ्य पता चलने की उम्मीद है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान [इसरो] के इस 'चंद्रयान प्रथम' अभियान से जुड़ी भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला [पीआरएल] के निदेशक प्रोफेसर जे एन गोस्वामी का कहना है कि भारत ने पहली बार इस क्षेत्र में दो कदम आगे बढ़ कर काम किया है।

उन्होंने कहा, 'चंद्रयान के साथ हाई रिजोल्युशन रिमोट सिस्टम से संचालित टैरेन मैपिंग कैमरा होगा जो चंद्रमा की सतह में जल, रसायन और अन्य खनिजों की तलाश करेगा। हाई एनर्जी एक्सरे, गामा किरणों और इलेक्ट्रो मैग्नेट स्पेक्ट्रम के जरिए चालीस किलोमीटर क्षेत्र का एक साथ अध्ययन किया जा सकेगा।'

उन्होंने बताया कि इससे पूर्व अमेरिका, रूस, जापान आदि देशों की ओर से की गई खोज में कम क्षमता वाले उपकरणों की मदद ली गई थी, जिससे सतह विशेष का ही अध्ययन किया जा सका। लेकिन, चंद्रयान के साथ पहली बार 500 मेगापिक्सल और 4 मेगाबाइट क्षमता वाले उपकरण भेजे जाएंगे जिससे शोध को एक निश्चित परिणाम तक ले जाया जा सके।

गोस्वामी ने कहा कि अमेरिका, रूस, चीन आदि देशों ने चंद्रमा पर अभी तक अध्ययन तो किया लेकिन उनका ध्यान शोध से ज्यादा शक्ति और तकनीकी प्रदर्शन पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी तकनीकी क्षमता से आगे जाकर पहली बार मानव रहित यान तैयार किया है, जिसे इसरो निर्मित पीएसएलवी से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

चंद्रयान की उल्टी गिनती

यदि मौसम और अन्य स्थितियां अनुकूल रहीं तो चंद्रयान-1 को 22 अक्टूबर को सुबह सवा छह बजे श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया जाएगा। चंद्रयान को बेंगलूर में स्थापित इडिया स्पेस डाटा सेंटर से नियंत्रित किया जाएगा। करीब एक माह बाद यह तस्वीरें भेजना प्रारंभ करेगा।

भारत के चंद्रयान मिशन की उपयोगिता इससे और बढ़ जाती है कि अमेरिका, ब्रिटेन, स्वीडन, जर्मनी और बुल्गारिया भी इस यान के जरिए अपने उपकरण अंतरिक्ष में भेज रहे हैं।



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